ईश्वर, तेरे चरण में,
दौड़ के आया, शरण में,
मुझे तुझसे ये कहना है...
साँसों संग तू स्मरण में
दर्शन तेरा पाकर प्रभु,
शुद्ध में खो जाता हूँ...
तेरी यात्रा को जानकर,
बस तेरा हो जाता हूँ...
बस तेरा हो जाता हूँ
अब की बार जो बिछड़ा अगर,
भटकूँगा अति भव रण में...
मुझे तुझसे ये कहना है...
साँसों संग तू स्मरण में
तेरे रास्ते पे चल कर,
पाना है सम्यक दर्शन...
जो न हुआ यह अनुभव,
व्यर्थ है सारा जीवन...
व्यर्थ है सारा जीवन
ना हो ऐसा अब की बार,
साक्षी रहना है आचरण में
मुझे तुझसे ये कहना है...
साँसों संग तू स्मरण में
ईश्वर, तेरे चरण में,
दौड़ के आया, शरण में,
मुझे तुझसे ये कहना है...
साँसों संग तू स्मरण में

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