मेरी साँसों में तेरा ही नाम है,
तेरा जीवन ही तेरा पैगाम है,
तोड़ दिए तूने तेरे सब करम...
अब है मेरा धरम,
करूँ कुछ तो शरम,
मोह को मार के,
मिटा दूँ सब भरम...
तूने जो रास्ता, दिया होकर निस्वार्थ,
चलकर उसपे, साधूँ मैं परमार्थ,
और कोई नहीं, विकल्प है शेष,
इसपे चलने से ही, जाएगा ग़म...
अब है मेरा धरम,
करूँ कुछ तो शरम,
मोह को मार के,
मिटा दूँ सब भरम...
हर पल ये अभ्यास में, डूबा रहूँ मैं,
कर्म उदय में, समता देखूँ मैं,
मानव भव ये, अनमोल बहुत,
ये विवेक कभी भी न हो कम...
अब है मेरा धरम,
करूँ कुछ तो शरम,
मोह को मार के,
मिटा दूँ सब भरम....
मेरी साँसों में तेरा ही नाम है,
तेरा जीवन ही तेरा पैगाम है,
तोड़ दिए तूने तेरे सब करम...
अब है मेरा धरम,
करूँ कुछ तो शरम,
मोह को मार के,
मिटा दूँ सब भरम...

1 comment:
तेरी मेरी हर साँस का यहीं धरम
तू और में मिलके करें अब ये करम
अरज यहीं सारे जहां के लिए
बस मोह को मार के मिटा के,
मिटाए सब ही भरम।।
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