सालों से है इस शरीर का घर,
मुंबई नाम का माया नगर,
कुछ दिनों के लिए चल पड़े हम,
उस मोह-मयी को अलविदा कहकर...
पहुँचते ही लखनऊ शहर,
बंद रास्तों का मचा था कहर,
बस को छोड़, हम पहुँचे दुर्ग्मा (restaurant),
मेट्रो सुविधा का सहारा लेकर...
संतुष्ट करके अपना जठर,
घूमने निकले सड़कों पर,
हाथियों की श्रृंखला देख,
यूपी दर्शन पार्क में घुमाई नज़र...
अगली सुबह आगे बढ़ा सफ़र,
श्रावस्ती भूमि है पवित्रता सभर,
बुद्ध जी के सैकड़ों चातुर्मास,
संभव जिनकी तपस्या प्रखर...
अयोध्या नगरी है भक्ति सिमर,
श्री राम के चरणों में भक्त बेफ़िकर,
आदि, अजीत, अभिनंदन, सुमति स्पर्शन,
अनंत अंधकार मिटा, लाता उजाला अमर...
पद्म प्रभु का है जहाँ अत्तर,
चंदनबाला, अनाथी, अनेक ने पूजे वीर ईश्वर,
गौतम बुद्ध के प्रसंगों से सुवासित,
कौशांबी, प्रभासगिरि भी है अति सुंदर...
आदि पुरुष दादा ऋषभ जिनवर,
प्रयागराज में जीता कर्म समर,
त्रिवेणी संगम को करके प्रणाम,
वाराणसी को छूने का आया अवसर...
पारस के चार कल्याणकों की धरोहर,
भेलूपुर में वंदन करते नारी और नर,
सुपार्श्व दादा की रौनक,
भदैनी जैन घाट, गंगा लहर...
बुद्ध की प्रथम देशना, सारनाथ निखर,
श्रेयांस प्रभु की सिंहपुरी निडर,
चंद्रपुरी में चमक रही है,
चंद्रप्रभु की शान निरंतर...
चिंतामणि (पारस) के चरणों में झुकाया सर,
भोले विश्वनाथ का अद्भुत मंजर,
मइया की आरती के, नाव से दर्शन,
लौट आए हम, भेंट, यादें, प्यार लेकर !!!

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