मैंने पूछा, खुशी का पता क्या है?
उसने कहा, खुशी की व्याख्या बता, क्या है?
मैंने बोल उठाः
चेहरे पर मुस्कान लाए, वो खुशी।
मीठे से ख़्वाब दिखाए, वो खुशी।
मित्र परिवार को प्यार दे और पाए, वो खुशी।
मधुर विचारों को जगाए, वो खुशी।
उसने पूछा, बता ये सब पाने को जाना कहाँ है?
जैसे ही मैं सोचने लगा, उसने कहा...
ये सब तो तेरे और मेरे भीतर है, अभी है, यहाँ है।

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