Thursday, April 16, 2026

10. बहुत दूर से आया, करने दर्शन.

बहुत दूर से आया, करने दर्शन,

एक बार देख लो...

एक बार देख लो, मुझको भगवन...


निकला निगोद से, महेरबानी आपकी,

काल अनंत बाद, टूटी बेड़ी पाप की,

बादर पर्याय में...

बादर पर्याय में, मिला फिर जीवन...

बहुत दूर से आया, करने दर्शन...


आगे बढ़ा और, त्रस में बसा मैं,

विकलेन्द्रिय में, भवों तक फँसा मैं,

असंग्नी का...

असंग्नी का, हुआ तब मिलन...

बहुत दूर से आया, करने दर्शन...


पुण्य उदय से, संग्नी दिशा मिली,

विवेक कम था, लेकिन दशा खिली,

शुभ धन कमाया...

शुभ धन कमाया, ठिकाने था मन...

बहुत दूर से आया, करने दर्शन...


मनुष्य भव अब, है व्यवस्थित,

एक ही विकल्प है, पाना है समकित,

शुद्ध के लक्ष से...

शुद्ध के लक्ष से, क्रिया और भजन...

बहुत दूर से आया, करने दर्शन,

अब पास आपके...

अब पास आपके, है आना भगवन...

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