तेरा मेरा नाता अमर,
लेकिन भटकूँ मैं तो इधर,
मेरे प्रभु, मुझको बता,
पहुँचूँगा कब अपने भीतर
कह रहा है अंतःकरण, अब ये बात ना टले,
तू जहाँ बस गया, नीयत मेरी वहीं चले,
निर्णय है लेना बनके निडर,
लेकिन भटकूँ मैं तो इधर...
तेरा मेरा नाता अमर,
कब तक भटकूँ, इधर उधर...
साथ तेरा ज़रूरी है, तू मसीहा मेरा है,
रोशनी से उजाला कर, मेरे यहाँ अँधेरा है,
अब की बारी, मैं चूका अगर
भटकता रहूँगा, जाने किधर
निर्णय ले लूँ तो शुरू हो सफर
आऊँगा तब, मोक्ष नगर
तेरा मेरा नाता अमर,
जल्दी मिलूँगा, तुझे अपने घर

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