गलत है हिंसा और झूठ,
चोरी और कुशील भी ना है सही,
लेकिन परिग्रह थोड़ा रख लिया,
तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं...
"थोड़े" की मर्यादा क्या भला?
ये माया चारों ओर से घेर रही,
अरे साहब जीवन निर्वाह है ज़रूरी,
और परिवार के लिए छोड़ना है वही...
परिग्रह के साथ जुड़ा है मोह,
राग, द्वेष, ममता, इत्यादि,
हाँ, उम्र होने पर सब छोड़ देंगे,
फिलहाल, सोचना है कल, और जीना है आज भी...
करते रहने दो जो कर रहे हैं,
दुनियादारी से है बेहतर, ये सब ही,
गर्व है हमें धार्मिक होने का,
भगवान जी भी तो बताकर गए यही !!!

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