हे जिनवर, ओ जिनवर...
है तेरा सहारा, तू ही है मेरा...
कहता है दिल ये, तेरे सिवा अब, ना हो सवेरा...
मेरे कर्म इतने, बोझिल हैं कैसे?
मोह तिमिर में, फँसा हूँ मैं ऐसे...
ना दिखता मुझे पथ,
जो तूने बताया,
है छाया हुआ, केवल अंधेरा...
हे जिनवर, ओ जिनवर...
है तेरा सहारा, तू ही है मेरा...
तेरी हर आज्ञा, को अब मैं स्वीकारूँ
जागृति रखकर, ये जीवन गुज़ारूँ...
हर क्षण मुझे अब,
रहना चौकन्ना,
जैसे सिपाही है, देता पहेरा
हे जिनवर, ओ जिनवर...
है तेरा सहारा, तू ही है मेरा...
(Tune: ye raatein ye mausam nadi ka kinara)

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